मल्हनी चुनाव: कांग्रेस "एक तो तीत लौकी दूजे चढ़ी नीम की डाल" वाले मुहावरे को कर रही है चरितार्थ


जौनपुर। मल्हनी विधानसभा के लिए हो रहे उप चुनाव में कांग्रेस के नेता इस मुहावरे को चरितार्थ कर रहे हैं कि  "एक तो तीती लौकी  दूजे चढ़ी नीम की डाली "जी यहाँ बता दे कि एक तो कांग्रेस की हालत पतली हो चुकी है उसे एक एक वोट जुटाने में पसीने छूट रहे हैं। वोट जाति धर्म में बंध कर ऐसी राजनीति ककरने वाले दलों के साथ है। ऐसे में कांग्रेस जनो में एकता का न होना यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि पार्टी केवल नाम के लिए चुनावी जंग में है।
यहाँ बता दे कि पार्टी नेतृत्व ने चुनाव व्यवस्था का संचालन करने के लिए मल्हनी का प्रभारी बना कर बाजीराव खड्गे को भेजा है। खबर है पार्टी नेतृत्व द्वारा चुनाव लड़ने के लिए फंड भी प्रदान किया है। अब यहां पर खड्गे एक कार्यालय अलग भरसड़ा से संचालित कर रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस का कार्यालय शास्त्री पुल के पास बना है जहां जिलाध्यक्ष रहते हैं। दोनों एक दूसरे से दूरी बना कर कांग्रेस का प्रचार कर रहे हैं।


खड्गे जी फंड का पैसा कहां ख़र्च कर रहे हैं किसी को पता नहीं है। वहीं जिलाध्यक्ष भी अपने पद के गुमान में बाजीराव से मिलना उचित नहीं समझते हैं। ऐसे में सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि पार्टी का कितना वोट बैंक बढ़ाने के लिए कांग्रेस जन प्रयास रत है। खबर है कि पार्टी फंड की बन्दर बाँट चल रही है। अध्यक्ष और प्रभारी को दूर रहने एवं गुट बाजी करने से पार्टी को बड़ी क्षति संभव है। हंलाकि  मल्हनी का मतदाता सबसे उबा हुआ है लेकिन कांग्रेस की गुट बाजी देख इसके साथ आने से परहेज करता दिख रहा है। चुनाव के पहले कांग्रेस के जिस स्कोर की कल्पना थी वह भी प्रभारी एवं जिलाध्यक्ष के आपसी खींचतान से पूरी होती नहीं नजर आ रही है। हंलाकि नेतृत्व कांग्रेस को उठाने का तमाम जतन कर रहा है लेकिन उपरोक्त पदाधिकारीयों के चलते नेतृत्व का सपना साकार होगा कहना कठिन है। 

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