मृतक आश्रित नौकरी के मामले में विवाहित पुत्रियों के लिए ने दिया यह आदेश



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाहिता पुत्री को मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति देने से इनकार करने के जिला विद्यालय निरीक्षक फतेहपुर के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है और याची को नियुक्ति के लिए अर्ह मानते हुए तीन माह में आदेश करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने रेखा देवी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता घनश्याम मौर्य ने बहस की। मामले के तथ्यों के अनुसार जिला विद्यालय निरीक्षक ने यह कहते हुए याची को आश्रित कोटे में नियुक्ति देने से इनकार कर दिया था कि विधवा, तलाकशुदा पुत्री ही नियुक्ति पाने की हकदार हैं। विवाहिता पुत्री को यह अधिकार नहीं है। याची ने विमला श्रीवास्तव केस का हवाला देकर कहा कि कोर्ट ने विवाहित पुत्र की तरह विवाहिता पुत्री को भी आश्रित कोटे में नियुक्ति प्राप्त करने का हकदार माना है और कहा है कि लिंग के आधार पर भेद नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने नियुक्ति पर नए सिरे से आदेश करने का निर्देश दिया है।
अधिवक्ता घनश्याम मौर्य का कहना था कि याची की मां राजकीय बालिका इंटर कॉलेज फतेहपुर में परिचारिका थी। सेवाकाल में उनकी मृत्यु हो गई। याची ने आश्रित कोटे में नियुक्ति की अर्जी दी। जिसे डीआईओएस ने निरस्त कर दिया था। इस आदेश को याचिका में चुनौती दी गई थी।

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