हिंदी हमारी माँ की वाणी और पिता का आशीर्वाद इं० एल बी मौर्या



थरवई। हिंदी दिवस की 76वे वर्षगांठ पर ईo एल बी मौर्य द्वारा कहा गया की हृदय के भावों में जब भाषा उतरती है तब वह केवल शब्दों का समूह नहीं रहती, वह आत्मा का स्पंदन बन जाती है। हिंदी दिवस उसी स्पंदन की याद दिलाता है। हिंदी माँ की वाणी है, पिता का आशीर्वाद है बच्चों की किलकारी है राष्ट्र की आत्मा है। जब हम हिंदी में बोलते है तो हमारे भीतर से सहज प्रेम और अपनापन फूट पड़ता है। यह भाषा हमे किसी विदेशी चमक दमक के सहारे की नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी की सुगंध से जोड़े रखती है। सोचिए जब किसी गाँव की पगडंडी पर बूढ़ी माँ अपने बेटे को पुकारती है, तो उसकी आवाज में हिंदी की आत्मा होती है जब कोई कवि प्रेम और पीड़ा का गीत लिखता है तो उसने हिंदी की धड़कन होती है, हिंदी भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली व विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है

 कृष्ण मोहन मौर्या ( सच खबरें )

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