आइए जानते है अपनी हार का क्या कारण बताते है डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य


उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान सिराथू सीट से हार का सामना करना पड़ा था। यह सीट उनका गृह क्षेत्र है और यहां से उनकी हार की काफी चर्चाएं हुई थीं, लेकिन उनकी ओर जनादेश को स्वीकार करने के अलावा कोई टिप्पणी नहीं आई थी। अब खुद उन्होंने इस सीट पर अपनी हार की वजह बताई है। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, 'भाजपा कैंडिडेट के तौर पर मैंने सिराथू के इतिहास में सबसे ज्यादा वोट हासिल किए। लेकिन बसपा और कांग्रेस ने अपना समर्थन समाजवादी पार्टी को दे दिया। इसकी वजह से हमें कौशांबी जिले की तीन सीटों पर 30 हजार से कम अंतर से हार का सामना करना पड़ गया। 

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सिराथू सीट से मेरी हार के कुछ और कारण भी रहे हैं, लेकिन उनके बारे में मैं बात करना ठीक नहीं समझता। यही नहीं सच खबरें से दूरभाष पर बातचीत में इस बार पीडब्ल्यूडी मिनिस्ट्री न मिलने के सवाल पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यदि मुझे दूसरी बार यह मंत्रालय नहीं मिला है तो फिर गांवों को समझने का मौका मिला है। ग्रामीण विकास मंत्री के तौर पर मैं लोगों के दर्द को समझ सकूंगा और उनकी समस्याओं के समाधान निकाल पाऊंगा। यह जिम्मेदारी सौंपे जाने के लिए मैं लीडरशिप का आभारी हूं। 


विधानसभा चुनाव में सपा की सीटों में बड़ा इजाफा होने और भाजपा के आंकड़े में कमी आने को लेकर केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उन्हें झूठ के बल पर कुछ समर्थन मिला है। ओबीसी वोटों का समर्थन भाजपा को कम मिलने को लेकर केशव प्रसाद मौर्य़ ने कहा, 'निश्चित तौर पर उन्हें कुछ वोट झूठ और ओबीसी वर्ग की बातें करने से मिले हैं। लेकिन उनका झूठ उजागर हो गया है। बैकवर्ड क्लास के लोग पूरी ताकत से भाजपा के साथ रहे हैं। वह भाजपा के साथ हैं और भविष्य में भी साथ रहेंगे। अखिलेश यादव ने इस बार अपने राजनीतिक करियर की सबसे ज्यादा ऊंचाई हासिल कर ली है।'


बता दें कि पिछली योगी सरकार में भी डिप्टी सीएम रहे केशव प्रसाद मौर्य को सिराथू विधानसभा से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि उसके बाद भी हाईकमान ने उन्हें डिप्टी सीएम बनाने का फैसला लिया था। केशव प्रसाद मौर्य को भाजपा का ओबीसी चेहरा माना जाता रहा है। ऐसे में उनकी हार की काफी चर्चा हुई थी। कहा जा रहा है ओबीसी मतों के बड़े पैमाने पर सपा के पक्ष में जाने के चलते ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा। सिराथू विधानसभा सीट पर पटेल, मौर्य समेत ओबीसी जातियों की अच्छी खासी तादाद है।


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