शो पीस बने गांवों में बने सामुदायिक शौचालय |

खुटहन, जौनपुर। स्वच्छ भारत महाभियान के तहत एनआरएलएम के द्वारा गांवों में लाखों की लागत से बनाए गए सामुदायिक शौचालय शो पीस बन कर रह गए हैं। कहीं काम अधूरा, कहीं ताला बंद तो कहीं कचरों का अंबार जमा हुआ है, जबकि यहां स्वयं सहायता समूह की एक महिला को रखा गया है, जिसे 6 हजार मानदेय व तीन हजार साबुन, तौलिया, सेनेटाइजर आदि के लिए प्रति माह सरकारी धन दिया जाता है। बावजूद इसके उपयोगिता की दृष्टि से शौचालय निरर्थक साबित हो रहा है।विकास खंड के 95 ग्राम पंचायतों में दो वर्ष पूर्व 91 गांवों में लगभग तीन लाख प्रति शौचालय की लागत से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सामुदायिक शौचालय बनाया गया। निर्माण के बाद गांव के सबसे पुराने स्वयं सहायता समूह से एक महिला केयर टेकर साफ सफाई के लिए तैनात किया गया। उसे हर माह 6 हजार रुपए मानदेय पर नियुक्त किया गया। इसके अलावा साबुन, तौलिया, शीशा, कंघी, सेनेटाइजर आदि के लिए 3 हजार रुपए प्रति माह अलग से दिया जाता है। बावजूद इसके क्षेत्र में लगभग एक दर्जन शौचालयों को छोड़ दिया जाय तो शेष 79 गांवों में कहीं दरवाजा टूटा है, कहीं सबमर्सिबल पंप खराब, कहीं कचरों का अंबार तो कहीं केयर टेकर का पता ही नहीं है। शौचालय में ताला लटक रहा है। एक महिला केयर टेकर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मानदेय तो तीसरे चौथे महीने मिल जाता है, लेकिन साफ-सफाई साबुन, हार्पिक आदि लिए जो तीन हजार निर्धारित है, वह कभी नहीं मिलता। ब्लाक मुख्यालय पर ही इस धन का बंदरबांट कर लिया जाता है, यदि केयरटेकर का आरोप सही हैं तो हर माह सफाई के लगभग 2.73 लाख रुपए सरकारी धन का गबन किया जा रहा है।

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